विभाग विवरण

पंजीयन विभाग

पंजीयन का उद्देश्य

 

सम्भावना में इलाज लेने वाले लोगो को प्रोटोकाल के अनुसार अलग अलग पद्धति द्वारा इलाज दिलवाना व उनके स्वास्थ्य और जहरीली रसायन से जुडी जानकारी के आँकड़ो का दस्तावेजीकरण करना।

 

पंजीयन का आधार

 

1.       गैस पीडितों हेतु - टाटा सर्वे (टाटा सर्वे क्या है? - टाटा स्कूल ऑफ सोशल साइस बाम्बे के छात्रो द्वारा 1985 में गैस काण्ड के पीडित परिवार के सदस्यों को एक रसीद प्रदान की गई जिसे टाटा सर्वे कहा जाता है।

2.       1984 का राशन कार्ड

(जिनका जन्म 31 दिसम्बर 1986 तक का है, उनके माता-पिता का टाटा सर्वे और जन्म प्रमाण पत्र या फिर     पॉचवी कक्षा की अंकसूची)

3.       प्रदूषित भूजल पीड़ित हेतु - वर्तमान राशनकार्ड, मतदाता परिचय पत्र, आधार कार्ड, नगर निगम द्वारा दी गई रसीद, ऑगनबाडी कार्ड, जन्मप्रमाण पत्र।

4.       अपीडितो के लिये - सम्भावना के रिसर्च विभाग द्वारा दिया गया सहमति पत्र।

 

विशेषता -

1.       सम्भावना के पंजीयन विभाग में यहॉ हर इलाज लेने आने वाले व्यक्ति की सम्पूर्ण जानकारी को चाहे वो व्यक्तिगत हो या फिर चिकित्सीय जानकारी हर महत्वपूर्ण जानकारी को कागजीकरण के साथ कम्प्यूटरीकरण भी किया जाता है। जिसका एक रिकार्ड स्वास्थ्य पुस्तिका के रूप में इलाज लेने वाले के पास होता है, तथा दूसरा कम्प्यूटरीकरण के रूप में सम्भावना में होता है।

2.       पंजीयन विभाग का मुख्य रूप से यही प्रयास होता है कि यहॉ आने वाले हर इंसान से हमारा व्यवहार शालीनतापूर्वक हो,जिससे उन्हे यह एहसास न हो कि वह किसी अस्पताल मे आए है।

3.       सम्भावना में आने वाली हर महिलाओ का प्रजनन व माहवारी इतिहास की जानकारी को लेना और 6 माह में उसे दोबारा लेना व 35 साल से ऊपर की महिलाओ को बच्चेदानी के मुँह के कैंसर की प्रारंभिक पहचान हेतु महिला चिकित्सक के पास भेजना।

4.       पंजीकृत लोगो की फोटो उनकी स्वास्थ्य पुस्तिका के साथ साथ कम्प्यूटर में रखना जिससे फोटो द्वारा इलाज लेने वाले की सही पहचान हो सके ।

5.       गैस पीडित एवं प्रदुषित भूजल पीडित के कागजात न होने की स्थिति में पंजीयन विभाग द्वारा 1984 का पता लेकर तथा भूजल पीड़ित इलाके का पता लेकर सर्वेयर द्वारा सर्वे कर सत्यापित कराना कि वो वास्तव में पीड़ित है या नहीं ।

6.       गंभीर रोगी को प्राथमिकता के साथ इलाज हेतु डॉ. के पास पहुचाना।

7.       इलाज के प्रोटोकाल के आधार एवं इलाज लेने वाले की स्वेच्छानुसार उन्हे एलौपैथ, आयुर्वेद व महिला चिकित्सा के पास भेजना।

8.       प्रत्येक माह में ऊँचाई व वजन लेना, पते व मोबाइल नम्बर अपडेट करना तथा इस जानकारी का भी दस्तावेजीकरण करना।

9.       बढाना - पंजीयन कर्ताओ  के नाम व कार्य करते हुए फोटो, ताजा ऑकडे प्रति 15 दिन।