विभाग विवरण

आयुर्वेद विभाग

परिचय :

अँग्रेजी इलाज के अलावा सम्भावना अस्पताल में पुरातन भारतीय वैद्य शास्त्र आयुर्वेद द्वारा भी पीड़ितों का इलाज होता है। सम्भावना में रसायन पीड़ितों के लिए आयुर्वेद इलाज इसीलिए शुरू किया गया ताकि पीड़ितों की अँग्रेजी दवाइयों पर निर्भरता कम हो, इन दवाओं के अधिक व अनैतिक सेवन से होने वाले नुक़सानों से बचाव हो व बीमारी का लक्षण आधारित इलाज न करते हुए जड़ से निर्मूलन हो।

दो आयुर्वेद चिकित्सक व तीन पंचकर्म थेरेपिस्ट आयुर्वेद विभाग में काम करते हैं। हर रोज़ 70-80 गैस पीड़ित व प्रदूषित भूजल पीड़ितों का सम्भावना में उगी हुई 100 से ज़्यादा तरह की वानस्पतिक जड़ी-बूटियों से बनी हुई दवाओं जैसे वटी, तेल, मल्हम इत्यादि व पंचकर्म के कई प्रकार की विधिओं द्वारा जैसे अभ्यंग (तेल मालिश), स्वेदन (भाप स्नान), शिरोधारा (सिर पर औषधियों की धारा) व विषमुक्तिकरण के अनेक पंचकर्म तरीकों से शरीर का विषशोधन व बीमारियों का जड़ से इलाज किया जाता है।

सम्भावना में आयुर्वेद इलाज के कुछ मुख्य विशेषताएँ :

1.   केवल शास्त्रोक्त दवाइयों का उपयोग।  

2.   आयुर्वेद पद्धति के विष चिकित्सा अनुसार इलाज।

3.   नुकसानदेह भारी धातुओं और खनिज आदि से बने कोई भी दवाइयों का इस्तेमाल नहीं होता।

4.   सम्भावना में बने इलाज प्रोटोकॉल के आधार पर एकल व मिश्रित इलाज होता है।

5.   कई गंभीर व दीर्घकालिन बीमारियों का आयुर्वेद, योग व ऐलोपैथ इलाज पद्दतियों के संयोग से सफल रूप से इलाज होता है।

6.   आधुनिक जाँचों की सुविधाओं के जरिये इलाज के असर का आंकलन किया जाता है।

पिछले 20 सालों की उपलब्धियां :

1.   गैस पीड़ित व प्रदूषित भूजल पीड़ितों में पाई जाने वाली कई बीमारियों में जैसे साँस की तकलीफ, पेट की बीमारियाँ, चमड़ी रोग, जोड़ों की बीमारियाँ, माहवारी अनियमितता, शक्कर की बीमारी, घबराहट, अनिद्रा, सिरदर्द, गठिया, लकवा, कमजोरी आदि बीमारियों का आयुर्वेद से इलाज खास तरह से फायदेमंद पाया गया है।

2.   पिछले 20 सालों में 15 हज़ार से भी ज़्यादा लोग आयुर्वेद इलाज ले चुके हैं। शक्कर की बीमारी, उच्च रक्तचाप, थाइरोइड की बीमारी, साँस की बीमारी, हृदय रोग व अन्य गंभीर और दीर्घकालिन बीमारियों में मिश्रित इलाज यानि आयुर्वेद, ऐलोपैथ व योग पद्दतियों से मिलकर इलाज करने से पीड़ितों में विशेष लाभ देखा गया है।

3.   लम्बे समय से अँग्रेजी दवाओं पर लोगों की निर्भरता प्राकृतिक जड़ी-बूटियों द्वारा इलाज से कम किया गया।

4.   स्टेरोइड व दर्द निवारक दवाओं, एंटीबाओटिक व अन्य नुकसानदेह दवाओं के बदले आयुर्वेद पंचकर्म एक अच्छे विकल्प के रूप में सामने आया।

5.   प्रदूषित भूजल पीड़ित लोगों में जहरीले रसायन से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों और पंचकर्म विषमुक्ति विधि से शरीर से विष निकालने के विषय पर शोध करने हेतु भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आई.सी.एम.आर) द्वारा सम्भावना आयुर्वेद विभाग को शोध हेतु स्वीकृति प्रदान की गयी।

6.   दुनियाभर में जहरीले रसायनों से होने वाली बीमारियों में आयुर्वेद, योग व एलोपेथ द्वारा सुरक्षित, सरल व स्थायी समग्र इलाज हो सकता है। यह सम्भावना ने पिछले 20 सालों में प्रमाणित किया गया।

 

आयुर्वेद चिकित्सक    :      डॉ॰रूपा बद्दी, डॉ॰माली एम.एम.

पंचकर्म थेरेपिस्ट     :      बीजू कुमार नायर, बीना पिल्लई

पंचकर्म सहायक      :      गीता धोटे