विभाग विवरण

शोध विभाग

शोध विभाग की आवश्यकता क्या है या उददेश क्या है ?

1.       वैज्ञानिक, वैधानिक व बेहतर इलाज के प्रमाण एकत्र करना।

2.       शोध द्वारा किसी त्रासदी या महामारी का हल ढूँढना या हल निकालने का प्रयास करना।

3.       कार्बाइड और दुनियाभर में फैलते रसायनों के खतरों की जानकारी व उसके दूरगामी प्रभावों की जानकारी जुटाना।

4.       पर्यावरणीय स्वास्थ्य सम्बन्धी खतरों की जानकारी जुटाना

उपलब्धियाँ:

1.       गैस पीड़ितों की संतानों की बढ़त में अंतर के निष्कर्ष सम्बन्धी शोध जर्नल ऑफ अमेरिकन मेडिकल एसोसिएन (जामा) में अक्टूबर 2003 में प्रकाषित।

2.       फेडरेन ऑफ अमेरिकन सोसायटीज़् फॉर एक्सपेरिमेन्टल बायोलॉजी (फेसेब) में जामा में प्रकाशित शोध के फॉलोअप का वर्ष 2008 में प्रकान।

3.       अमेरिकन जर्नल ऑफ इन्डस्ट्रियल मेडिसिन (एजिम) में गैस पीड़ितों की कन्या संतानों का बढ़त सम्बन्धी शोध प्रकाशित। सभी प्रकाषिक शोध की रिपोर्ट पी.डी.एफ कॉपी डालना।

विशेषताएँ :-

नैतिकता :

1. शोध नीति समिति:- सम्भावना की एक शोध नीति समिति है जो किसी भी शोध को करने से पहले उसके नैतिक मूल्यों को जाँचती है और फिर उसको करने की स्वीकृति देती है।

2.   समुदाय को जानकारी देना:- बस्ती में जो भी शोध किए जाते हैं उसके पहले समुदाय (बस्तियों) में घूमकर और पर्चे बाँटकर शोध की पूरी जानकारी दी जाती है और तब शोध कार्य बस्ती में शुरू किया जाता है।

3.   सहमति लेना:- समुदाय में जब शोध शुरू किया जाता है तब प्रत्येक परिवार व व्यक्ति से शोध में शामिल होने के लिए लिखित सहमति ली जाती है।

4.   समुदाय की सहभागिता के साथ काम:- जितने भी शोध सम्बन्धी कार्य समुदाय के लिए किए जाते हैं। उसमें समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित होती है। समुदाय के अवलोकन और विचारणीय बिन्दुओं के आधार पर कार्य किया जाता है।

5.   शोध में मिली समस्याओं के प्रति ज़िम्मेदारी निभाना:- सम्भावना अपनी एक और नैतिक ज़िम्मेदारी भी हमेशा निभाता है कि सम्भावना द्वारा जो भी शोध कार्य किए जाते हैं और शोध के दौरान जो स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या पाईं जाती हैं उसके निराकरण के लिए सम्भावना का शोध विभाग ज़िम्मेदारी लेता है। सम्भावना द्वारा हाल ही में 100000 से अधिक आबादी में किए गए ‘‘भोपाल के अलग-अलग समुदायों का स्वास्थ्य सर्वेक्षण’’ में मिले जन्मजात विकृति से ग्रस्त बच्चों और किशोरों का इलाज के लिए फॉलोअप किया गया। जिनमें से इलाज के लिए बुलाए गए बच्चों और किशोरों में से 163 को अलग-अलग सरकारी और गैर सरकारी संस्थाओं में रेफर किया गया। अब तक 43 बच्चों और किशोरों का इलाज पूरा हो चुका है और वो पूरी तरह ठीक हैं।

2. वैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल :

अंतर

सरकार द्वारा किए जाने वाले शोध

सम्भावना द्वारा किए जाने वाले शोध

समस्या के आधार पर शोध के विषय का चयन

 

सरकार द्वारा समुदाय में स्वास्थ्य सम्बन्धी जो समस्याएँ अवलोकन में आ रही हैं उसके आधार पर और समस्या के वैज्ञानिक पहलुओं के आधार पर विषय का चयन नहीं किया जाता।

सम्भावना द्वारा सदैव इस बात का ध्यान रखा जाता है कि समुदाय द्वारा जो तथ्य बताए जा रहे हैं उनके आधार पर विषय का चयन हो और सही नतीजे प्राप्त हों।

समुदाय की भागीदारी

 

इसमें समुदाय की किसी भी प्रकार से कोई भागीदारी नहीं होती हैं।

सम्भावना में बस्ती आधारित शोध में पहले समुदाय को विश्वास में लिया जाता है और समुदाय के लोगों को कार्य में शामिल कर कार्य सम्पन्न किए जाते हैं।

समुदाय को शोध की जानकारी

 

समुदाय को शोध क्यों और किस विषय पर किया जाता है इसकी कोई जानकारी नहीं दी जाती।

कोई भी शोध शुरू करने से पहले बस्ती प्रतिनिधियों को इसकी पूरी जानकारी दी जाती है और घर-घर जाकर पर्चे बाँटे जाते हैं जिससे कोई भी जानकारी से वंचित न हो जाए।

सहमति लेना

 

शोध में शामिल भागीदारों को शोध की जानकारी व उनकी सहमति नहीं ली जाती।

शोध में शामिल भागीदार को ली जाने जानकारी के बारे में बताना, शोध के बारे में जानकारी देना और छपे हुए सहमति पत्र पर भागीदार की सहमति लेना सम्भावना की मुख्य जि़्म्मेदारी में आता है।

आँकड़ों को इकट्ठा करने में वैज्ञानिक बातों का ध्यान

 

आँकड़े किस प्रकार लिए जाए और सवाल किस प्रकार के हों इस बात का ध्यान नहीं रखा जाता। जिम्मेदार व्यक्तियों से प्रश्नावली न पूछकर किसी बच्चे या परिवार से असंबंधित व्यक्ति से पूछकर प्रश्नावली भरी जाती है और छूटी जानकारी सभी शोधकर्ता एक स्थान पर बैठकर एक साथ भर देते हैं।

विशेषज्ञों द्वारा बताए गए वैज्ञानिक आधार पर आँकड़ें इकट्ठे किए जाते हैं।

शोध के बाद की जि़्ाम्मेदारी

 

शोध में मिली स्वास्थ्य समस्या या पीड़ितों की समस्या के निराकरण के लिए कोई पहल नहीं

निरन्तर फॉलो-अप कर समस्या का निराकरण करना।

शोध का प्रकाषन

अवैज्ञानिक और अधूरे आँकड़ों द्वारा नतीजे प्रकाशित कर दिए गए।  20 प्रतिशत कॉ-हॉर्ट के आधार पर आँकड़ों को प्रकाशित कर दिया गया। 80 प्रतिशत कॉ-हॉर्ट का ह्रास बताया गया। शोध भी पियर रिव्यू द्वारा पत्रिका में प्रकाशित नहीं किए गए। 

सम्भावना कॉ-हॉर्ट समूह का निरन्तर फॉलो-अप कर 10 से भी कम कॉ-हॉर्ट का ह्रास हुआ और प्रकाषन भी पियर रिव्यू द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय मेडिकल पत्रिकाओं में करवाया जाता है।

 

1.       समुदाय आधारित शोध :- सम्भावना में समस्या को जानने व उसका उचित हल निकालने के लिए समुदाय में जाकर शोध सर्वेक्षण किए जाते हैं और प्रामाणिक आँकड़ें जुटाए जाते हैं।

2.       वैज्ञानिक तरीके और बस्ती आधारित अवलोकन के आधार पर विषय का चयन :- शोध के लिए जिन विषयों का चयन किया जाता है वह समस्या की पृष्ठभूमि व पीड़ितों (समुदाय के लोगों) के अवलोकन के आधार पर तय किए जाते हैं।

3.       उपकरण :- प्रश्नावली, दिशानिर्देशिका, पीपल्स कैलेन्डर व यांत्रिक उपकरणों का शोध में इस्तेमाल किया जाता है।

 

कदम उठाना या कार्रवाई करना :

1.       समुदाय को नतीजों से अवगत कराना :- शोध के दौरान मिली समस्याओं को सूचीबद्ध करना एवं शोध के दौरान मिली समस्याओं से समुदाय को अवगत कराना। जिससे समुदाय स्वयं अपनी समस्या को जान सके और स्वयं अपने स्तर पर कदम उठा सके।

2.       समुदाय के सहायक बनना :- शोध के दौरान मिली समस्याओं से बचाव के लिए प्रयास व उपायों को समुदाय के लागू करना। जिससे समुदाय को समस्याओं से उबरने में सहायता मिल सके।

3.       ज़िम्मेदार एजेंसियों को बताना व उनके द्वारा समस्या के हल के लिए कार्रवाई करवाना :- संबंधित सरकारी या गैर सरकारी एजेंसियों को शोध के नतीजों से अवगत कराना और ये एजेंसियाँ नतीजों के आधार पर उचित कदम उठाएँ व समुदाय को इसका लाभ मिले इसका प्रयास करना।

वर्तमान शोध :

वर्तमान में सम्भावना द्वारा विषय ‘‘भोपाल के अलग-अलग समुदायों का स्वास्थ्य सर्वेक्षण’’ पर शोध सर्वेक्षण कार्य पूर्ण किया गया। जिसमें 100000 से अधिक लोगों को उनकी सहमति से भागीदार बनाया गया। इस शोध का विश्लेषण चल रहा है।

 

सम्भावना और सरकार द्वारा किए जाने शोध में अंतर

स्टाफ सदस्य

संतोष क्षत्रिय,   फरहत जहाँ,    हरीओम विश्वकर्मा,     तस्नीम जैदी,    रीतेष पाल शैलेन्द्र चौरसिया